April 4, 2020

लॉकडाउन का असर सीधे झारखंड के ब्लड बैंकों पर पड़ा है, जिससे अस्पतालों में ब्लड खत्म होने के कगार पर

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए देश के पीएम ने कड़ा संज्ञान लेते हुए देश को 14 अप्रैल तक के लिए बंद कर दिया है, लेकिन झारखंड पर खतरा लगातार मडरा रहा है क्यों कि बताया जा रहा है कि जिसका असर झारखंड में ब्लड बैंको पर पड़ा है, लॉकडाउन होने के वजह से कोई कार्यकर्ता और कोई अन्य व्यक्ति अपना ब्लड देने के लिए अस्पताल तक नही जा रहा है, इतनाही नही गैरसरकारी ब्लड बैंक भी ज्यादातर गैर सरकारी संगठनों ने रक्तदान शिविरों को टाल दिया है, वहीं वालंटियर रक्तदाता भी रक्तदान करने नहीं पहुंच रहे हैं, बड़े बड़े अस्पतालों में रक्त की कमी हो गई है, जबकी रक्त के लिए सक्त जरुरी है,

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जानकारी के मुताबिक झारखंड के सबसे बड़ा अस्पताल हमेशा अपने स्टॉक में 400 यूनिट ब्लड रखने वाले रिम्स के ब्लड बैंक में फिलहाल सिर्फ 160 यूनिट और सदर अस्पताल रांची के ब्लड बैंक में 150 की जगह महज 60 यूनिट ब्लड बचा है, कुछ यही हाल राज्य के अन्य ब्लड बैंकों का भी है, बताया जा रहा है कि ब्लड की कमी से सबसे ज्यादा परेशानी थैलसीमिया, हिमोफिलिया और सिकल सेल एनीमिया के मरीजों को होगा, क्योंकि इन्हें समय-समय पर ब्लड चढ़ाना पड़ता है, सिर्फ रिम्स में थैलसीमिया-हिमोफिलिया के मरीजों के लिए हर माह 600 यूनिट ब्लड की जरूरत होती है, वहीं सदर अस्पताल के डे केयर सेंटर को हर माह 300 यूनिट की जरूरत होती है, इसके अलावे जरूरी सर्जरी, सिजेरियन प्रसव, दुर्घटना के शिकार लोगों के जीवन को बचाने के लिए भी खून की जरूरत होती है,

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ब्लड बैंकों में खून की कमी की वजह लॉकडाउन को बताया जा रहा है रिम्स अस्पताल के डा. सुषमा कुमारी का कहना है कि पहले अस्पताल को 60 से 80 यूनिट ब्लड मिल जाता था लेकिन अब ब्लड घट कर 30 से 35 यूनिट हो गया, वही अब अस्पताल में ब्लड की कमी हो लगी है उनका कहना है कि ऑपरेशन वाले लोगों को टाल कर कुछ ब्लड बचाया गया है न ही तो वो भी खत्म हो सकता था, साथ ही उन्होंने बताया कि रेड क्रॉस सोसाइटी को बढ़-चढ़ कर काम करने को कहा गया है, और उन लोगों की ब्लड लेनी है जिन लोगों को खासी और बुखार और सर्दी न हो

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