April 5, 2020

3 गांवों के लोगों ने गांव के बाहर घेरा लगा लॉकडाउन का मिसाल पेश की है- जानें

कोरोना वायरस को लेकर जहा पूरा देश चिंतित है तो वही पूरे भारत में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन कर दिया गया है,, तो वही बिहार में कोरोना वायरस के 6 मरीज मिले है जिनमें से एक की मौत हो गई है,तो वही झारखंड के तीन गांवों के लोगों ने एक मिसाल पेश की है, और अपने गांव के बाहर रास्ते को बंद कर दिया है, और एक पोस्टर लिख चिपका दिया है, ताकि कोई भी व्यक्ति इधर-उतर ना घूमें इतनाही नही गांव के युवकों ने एक-दूसरे पर नजर भी रख रहे है ।

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बताया जा रहा है कि पीएम के संबोधन के बाद लॉकडाउन को कामयाब करने के लिए औऱ कोरोना वायरस से बचने के लिए गांव के लोगों ने अपने गांव के बाहर रास्ते पर ही लकड़ी की मोट बल्लियों से बंद कर दिया गया है, और किसी को गांव में न आने दिया जा रहा है और न ही ग्रामीणों को बाहर जाने दिया जा रहा है, यही नही उस पोस्टर पर साफ-साफ लिख कर चिपकाया गाया है, सुरक्षित रहने और कोरोना वायरस को मात देने का एक ही तरीका है कि लॉकडाउन का पालन किया जाए और एक दूसरे से दूरी बना कर रखी जाए,

वही आपको बता दे कि राजधानी रांची से 25 किलोमीटर दूर स्थित जारा टोली गांव में करीब 150 घर हैं, यहां अधिकतर मजदूरी करने वाले लोग रहते हैं, जारा टोली गांव से पहले बादाम और महिलोंग गावों को जोड़ने वाले रास्तों पर युवकों ने खुद ही बैरीकेडिंग लगा दिए हैं, इन युवकों का कहना है कि चाहे जैसे भी हालात हों गांव में ही रहेंगे, इन्होंने कोरोना वायरस महामारी पर जागरूकता के लिए संदेश लिख कर लगा रखे हैं, सुरक्षित रहने और कोरोना वायरस को मात देने का एक ही तरीका है कि लॉकडाउन का पालन किया जाए और एक दूसरे से दूरी बना कर रखी जाए,

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वही ग्रामीणों से बात चीत करने से पता चला है कि इन गांवों के लोग कई शहरी लोगों से अधिक जागरूक हैं, शहरों में लॉकडाउन के उल्लंघन की कई रिपोर्ट आ रही हैं लेकिन इन तीन गांवों के लोगों ने सामूहिक बैठक कर फैसला किया कि 21 दिन तमाम विपरीत स्थितियों के बावजूद वो लॉकडाउन का पालन करेंगे,इस गांव में बहुत ऐसे लोग है जो प्रतिदिन मजदूरी करके अपनी परिवार का रोजी-रोटी चलाते है, उनलोगों से पुछने पर उन्होंने बताया कि हमलोग प्रतिदिन 300 रुपये दहाड़ी कमाते है लेकिन जब से लॉकडाउन लगा है तब से हमलोंगो ने फैसला लिया है कि कोई भी व्यक्ति गांव से बाहर नही निकलेगा, चाहे जैसे भी हो, मतलब आप समझ सकते है और आज इन लोगों ये साबित भी कर दिया है कि पढ़ने वालों से बिनपढ़ने वाले अच्छा तरह से होशियार होते है और नियमों का पालन कर सकते है ।

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