April 8, 2020
vasant panchami kaise manate hai

पटना डेस्क: माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी कहा जाता है। इस दिन का धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भारतीय समाज में काफी महत्व रहा है। पुराणों की माने तो, इस दिन ब्रह्माजी ने देवी सरस्वती का सृष्टि में आह्वान किया था और देवी प्रकट हुई । यही वजह है कि, इस दिन लोग माँ सरस्वती की पूजा की जाती हैं। इस दिन ज्ञान की वृद्धि और उन्नति के लिए बच्चों की शिक्षा शुरू करने की भी परंपरा रही है।

शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं, तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें।

क्यों हो रही पूजा की तारीख में उलझन?

इस बसंत पंचमी सरस्वती पूजा की तिथि को लेकर उलझन की स्थिति इसलिए बन गई है क्योंकि माघ शुक्ल पंचमी तिथि का आरंभ 29 जनवरी को सुबह 10 बजकर 46 मिनट पर हो रहा है। स्थानीय समय के अनुसार इसमें कुछ आगे-पीछे हो सकता है। पंचमी तिथि का समापन 30 जनवरी को दोपहर बाद 1 बजकर 20 मिनट पर हो रहा है। यही कारण है कि 29 जनवरी और 30 जनवरी को ज्योतिषियों में मतभेद उत्पन्न हुआ है।

आइए जानें कि कौन सा दिन सरस्वती पूजा के लिए उत्तम और शुभ है

हिंदू धर्म में शास्त्रीय मत यह है कि जिस दिन उदय तिथि हो यानी सूर्योदय जिस तिथि में हो पूरे दिन उसी तिथि का मान होता है। दूसरी बात कि पितरों की पूजा मध्य काल में होती है, और देवी-देवताओं की प्रथम प्रहर में इसलिए जिस दिन सूर्योदय के समय तिथि का आंरभ हो उसी दिन देवी-देवताओं का पूजन किया जाना चाहिए। शास्त्रों का मत है कि, सूर्योदय के समय अगर तिथि कुछ समय के लिए भी लग रही हो तो उसी तिथि का मान होता है और उसी तिथि में पूजन किया जाना चाहिए। इस नियम के अनुसार सरस्वती पूजन गुरुवार 30 जनवरी को किया जाना शास्त्र सम्मत होगा। इस दिन गुरुवार भी है जिससे यह ज्ञान की देवी सरस्वती के पूजन के लिए सर्वथा उचित तिथि है।

बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?

पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है. कहते है की, बेटी की विदाई और देवी की मूर्ति का विसर्जन गुरुवार को नहीं करना चाहिए। इस लिहाज से भी गुरुवार का दिन सरस्वती पूजन के लिए उत्तम है।

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