June 2, 2020

‘झारखंड’ ”सीएम हेमंत सोरेन” ने प्रवासी मजदूरों को वापस लाने के लिए ”गृहमंत्री” से हवाई जहाज के NOC की मांग

झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से राज्य के बाहर प्रवासी मजदूरों एवं देश के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में फंसे झारखंडियो को अपने राज्य वापस लाने के लिए हवाई जहाज के एनओसी की मांग कर रही थी। जिसके बाद केंद्र सरकार द्वारा मांग लगातार नजरअंदाज की जा रही है।  जिसके पास देश के सुदूर इलाके लद्दाख एवं उत्तर पूर्वी राज्यों में फंसे हुए झारखंड के प्रवासियों को मजदूरों को चार्टर्ड प्लेन चलाने की मांग मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक बार फिर से चर्चा तेज कर दी है।

बता दें कि गुरुवार को उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर प्रवासी मजदूरों को एयरलिफ्ट की अनुमति मांगी। इस पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। जिसकी सराहना बड़े पैमाने पर की गई। लेकिन कुछ आलोचकों ने इसे प्रचार पाने का हथकंडा बता दिया।  कोरोना वायरस के कारण की वजह से प्रवासी मजदूरों के आने का सिलसिला नहीं थम रहा है।  जिसकी वजह से हेमंत सोरेन ने शुरुआत से ही  सकारात्मक फैसले लिए हैं।  लेकिन देश के अधिकतर हिस्सों में प्रवासी मजदूरों के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर मिलने की वजह से उन्होंने आदेश जारी करके राज्य में पैदल चलने पर रोक लगाई। और राष्ट्रीय राजमार्ग पर हर 20 किलोमीटर की दूरी पर सामुदायिक किचन की व्यवस्था भी की है। साथ ही सभी मजदूरों को बसों के जरिए उनके स्थान तक पहुंचाया।

बता दे कि हवाई जहाज का इस्तेमाल करने का दावा उन्होंने शुरुआती दिनों में किया था, तो राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों द्वारा इस फैसले की खिल्ली उड़ाई गई थी। लेकिन इस बार भी गृह मंत्रालय से इस बारे में अनुमति के लिए उनके स्तर से हो रही, उनकी बेहद गंभीरता को दर्शा रहा है।
जबकि  केंद्र सरकार द्वारा आरंभ में प्रवासियों को लाने के लिए बसों के इस्तेमाल को मंजूरी दी गई थी। तो सीएम हेमंत सोरेन ने इसका प्रतिवाद किया था। और उन्होंने उस केंद्र सरकार को यह स्पष्ट किया था कि कम दूरी वाले स्थानों से बसों के जरिए लोगों को लाया जा सकता है। लेकिन दूर के इलाकों से लोगों को लाने के लिए ट्रेन जरूरी है।

जबकि इस दौरान उनके प्रतिवाद व्यवहार के कई सवाल खड़े किए गए थे। लेकिन जब तेलंगाना के लिंगमपल्ली से हटिया के लिए पहली ट्रेन रवाना हुई तो हलचल मच गई।  जिसके बाद आनन-फानन में बिहार समेत अन्य राज्यों ने झारखंड मॉडल को अपनाते हुए प्रवासी मजदूरों को लाने की प्रक्रिया आरंभ कर दी। लेकिन अब केंद्रीय गृहमंत्रालय द्वारा हवाई जहाज के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगने के बावजूद भी हो रही देरी को झारखंड मुक्ति मोर्चा ने मुद्दा बनाते हुए इस चर्चा को उछाला है। जिसमें झामुमो की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि देश के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में फंसे हुए झारखंडी ऊपर लाने के लिए हेमंत सरकार द्वारा लगातार केंद्र से हवाई जहाज की एनओसी की मांग रही है। लेकिन केंद्र सरकार लगातार यह मांग नजरअंदाज कर रही है। उम्मीद है कि जल्दी इसकी अनुमति मिल जाएगी। ताकि प्रवासी बंधुओं सुरक्षित अपने घर पहुंच सकेंगे।

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