D.EL.ED पास निजी शिक्षकों के पक्ष में हाईकोर्ट का फैसला तय, जाने क्यों ?
Sun. Jan 26th, 2020

 D.EL.ED पास शिक्षकों के पक्ष में हाईकोर्ट का फैसला तय, जाने क्यों ?

NIOS D.EL.ED

पटना : बिहार में NIOS के तहत D.EL.ED करने वाले शिक्षकों के लिए खुशी कि खबर आ रही है. NEWS ONE 11 के सूत्रों का कहना है कि आनेवाले सोमवार यानी की 20 जनवरी तक पटना हाईकोर्ट शिक्षकों के पक्ष में फैसला दे सकता है.

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दरअसल कल यानी की सोमवार को जस्टिस प्रभात कुमार झा की बेंच पर शिक्षकों की याचिका पर सुनवाई हो रही थी. जिसमें शिक्षकों का पक्ष अधिवक्ता वाई. वी. गिरी, राज मौली, प्रींस मिश्रा, और प्रणव कुमार ने रखा. जिसमें सभी दलिलों को सुनने के बाद कोर्ट ने NCTE के अधिवक्ता पीके शाही, सुनील कुमार और सरकार के वकील से जवाब तलब करने को कहा. जिसमें उन्होंने सफाई पेश की. जिससे नाराज जस्टिस प्रभात कुमार झा ने वकीलों की जमकर क्लास लगाई.

साथ ही कोर्ट ने वकीलों से सवाल किया कि कोई ऐसा कारण बताएं जिससे की कोर्ट इन शिक्षकों के पक्ष में फैसला ना दें.  जिसके बाद कोर्ट में सरकारी वकील और NCTE के वकीलों ने बोलने से चुप्पी साध ली. वहीं सूत्रों का कहना है कि, जिसके बाद कोर्ट ने वकीलों चुप्पी देख शिक्षकों के पक्ष में फैसला देने का निर्णय लिया. साथ ये भी जानकारी हाथ लगी की कोर्ट में जस्टिस प्रभात झा ने सरकारी वकीलों को डांट भी लगाई और कहा कि “ये क्या फैसला है जो आपने अपने मन से कोर्ट को 24 महीने के लिए बनाया और उसे 18 महीने में ही परीक्षा ले ली, इसके साथ ही जस्टिस ने कहा कि गर्व की बात तो ये है कि इन शिक्षकों ने 24 महीने के कोर्ष को 18 महीने में भी पूरा कर और पहली बार में ही परीक्षा में उतिर्ण हो गए ”

क्या है पूरा मामला

दरअलस बिहार सरकार ने माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की रिक्त स्थानों को भरने के लिए आवेदन निकाला. लेकिन NIOS से D.EL.ED करने वाले शिक्षकों जिन्होंने 24 महीने को कोर्ष को 18 महीने में ही पूरा किया था उसकी मान्यता को बिहार सरकार ने मानने से इंकार कर दिया था.

जिसके बाद NIOS से D.EL.ED निजी विद्यालयों के शिक्षकों ने बिहार सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला और सड़क से लेकर अनसन तक को भी उतारू हुए. लेकिन कहीं भी सफलता नहीं दिखने के बाद शिक्षकों ने 24 सितम्बर 2019 को हाईकोर्ट में जस्टिस अनील कुमार उपाध्यय की बैंच पर जनहीत याचिका दायर की लेकिन 1 ही सुनवाई के बाद जस्टिस अनील कुमार उपाध्यय को किसी और काम में लगा दिया गया, और सुनवाई की जिम्मेदारी जस्टिस प्रभात झा की बैंच पर शुरू हुई. इस तरह देख तो कुल मिला कर 14 से 15 मेंसनिंग और सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है.

जिसे 20 जनवरी तक सुनाया जा सकता है. वहीं कोर्ट की कल हुई कार्रवाही को देखने के बाद सुत्रों का मानना है कि कोर्ट पूर्ण रूप से शिक्षकों के पक्ष में दिख रहा है और उम्मीद जताई जा रही है कि कोर्ट फैसला पक्ष में ही देगा. अब देखने वाली बात होगी की कोर्ट क्या फैसला देती है.

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