April 8, 2020

अयोध्या मामले में फैसला देने वाले CJI रंजन गोगोई राज्य सभा के लिए मनोनित, उठने लगे सवाल !

रंजन गोगोइ राज्य सभा के लिए हुए मनोनित

भारतीय लोकतंत्र की ऊपरी प्रतिनिधि मंडल सभा में अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राज्य सभा के लिए पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को मनोनित किया है। पूर्व सीजेआई और राज्य सभा में मनोनित किए जाने वाले नए मनोनित सदस्य रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाले पांच जजों की संविधान पीठ ने 40 दिनों की नियमित सुनवाई के बाद सर्वसम्मति से 161 साल से लंबित अयोध्‍या भूमि विवाद में राम मंदिर निर्माण के पक्ष में अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।आपको बता दें कि 245 सदस्यों वाली राज्य सभा में संविधान के मुताविक राष्ट्रपति को 12 सदस्य को मनोनित करने का अधिकार होता है जिसके तहत चुनाव करते हुए आज यानी 16 मार्च को राष्ट्रपति कोविंद ने ये फैसला लिया है।

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हलांकि महामहिम राष्ट्रपति के इस फैसले और जस्टिस रंजन गोगोई को राज्यसभा के लिए नामित किए जाने पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आने लगी हैं। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट कर राष्ट्रपति के इस फैसले पर सवाल खड़ा किया। ओवेसी ने लिखा है कि ‘क्या यह ‘इनाम है’? लोगों को जजों की स्वतंत्रता में यकीन कैसे रहेगा? आपको बात दें कि औवेसी ने चीफ जस्टिस के रूप में रंजन गोगोई के अयोध्या मामले में दिए गए फैसले पर सवाल उठाया है।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में रंजन गोगोई का कार्यकाल करीब साढ़े 13 महीने का रहा। इस दौरान उन्होंनें कुल 47 फैसले सुनाए, जिनमें से कुछ ऐतिहासिक फैसले भी शामिल हैं। जिसमें अहम है अयोध्या मामले, चीफ जस्टिस के ऑफिस को आरटीआई के दायरे में लाने, राफेल डील, सबरीमाला मंदिर और सरकारी विज्ञापन में नेताओं की तस्वीर प्रकाशित करने पर पाबंदी जैसे मामले।

कौन रंजन गोगोई का जीवन परिचय

फाइल फोटो

18 नवंबर 1954 को जन्मे रंजन गोगोई  ने बतौर एडवोकेट साल 1978 में अपने करियर की शुरुआत की थी। रंजन गोगोई ने शुरुआत में गुवाहाटी हाईकोर्ट में वकालत की। उनको संवैधानिक, टैक्सेशन और कंपनी मामलों का दिग्गज वकील माना जाता था। इसके बाद उनको 28 फरवरी 2001 को गुवाहाटी हाईकोर्ट का स्थायी न्यायमूर्ति नियुक्त किया गया। 9 सितंबर 2010 को उनका तबादला पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में कर दिया गया। इसके बाद, 12 फरवरी 2011 को उन्हें पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बना दिया गया। 23 अप्रैल 2012 को उन्हें प्रमोट करके सुप्रीम कोर्ट का जज बना दिया गया। जब दीपक मिश्रा चीफ जस्टिस के पद से रिटायर हुए, तो उनकी जगह जस्टिस रंजन गोगोई को चीफ जस्टिस बनाया गया। आपको बता दें कि चीफ़ जस्टिस बनने से पहले रंजन गोगोई 12 जनवरी 2018 केंद्र सरकार के रोस्टर प्रक्रिया के खिलाफ प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर सुर्खियों में आए थे। जिसमें जस्टिस कूरियन जोसफ़, जस्टिस चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस मदन लोकुर शामिल हुए थे।

 

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