April 4, 2020

सरकारी अस्पतालों में बच्चे को जन्म देने पर बच्चों को आसानी से मिलेगा आधार, आधार में क्या हुआ फेर-बदल

पहचान पत्र के रुप में बनवाए जा रहे आधार कार्ड में सरकार ने लोगों के बनवाने के लिए बड़ा फेर बदल किया है, पहले आधार कार्ड जिनका नही बना था उनका आधार कार्ड बनवाने के लिए ठगी का मामला झेलना पड़ता था या फिर बैंको द्वारा बनवाए जा रहे पहचान के लिए लाइन में लग कर कई दिनों तक अपनी बारी का इंतिजार करना पड़ता था, लेकिन सरकार ने आधार में फेरबदल कर जिन बच्चों का आधार नही है वो अब आसानी से आधार बना सकेंग,

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दरअसल जानकारी के मुताबिक सरकारी अस्पतालों में अब जन्म के साथ ही नवजात का आधार कार्ड बन जाएगा। 24-25 मार्च को ट्रायल के बाद यह प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। मिली जानकारी के अनुसार यूआईडी जेनरेट करने वाले करीब 350 ब्लॉक कॉम्युनिटी मोबिलाइज़र इस काम के लिए तैनात किए जाएंगे। ताकि सरकारी अस्पतालों में जन्में बच्चे को आधार बनने में कोई परेशानी न हो और उन बच्चों को सीधे सरकारी योजनाओँ का लाभ भी मिल सके, साथ ही यह भी कहा जा सकता है कि इस मुहीम से लोग ज्यादा से ज्यादा अपने बच्चों का जन्म सरकारी अस्पताल में देगें, और सरकार के योजनाओं का फायदा उठा सकेगें, वहीं इसके साथ-साथ उनका जन्म प्रमाणपत्र बनवाने में भी माता-पिता को मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

वही हम आपको बता दे कि राज्य स्वास्थ्य समिति पूरे राज्य के जिला के सभी सदर अस्पतालों में आधार कार्ड बनवाने की व्यवस्था 15 मार्च से करने वाली थी लेकिन कुछ तकनीकि खराबी होने के वजह से राज्य स्वास्थ्य विभाग ने अब मार्च के अंत में या फिर अप्रैल के शुरु में शुरु कर देगी, वही आपको बता दे बिहार के 38 से 37 जिलों में सदर अस्पताल है वही अब दरभंगा को छोड़ बाकी सभी जिलों में सदर अस्पताल चालू हैं और इन सभी जगह आधार बनाने की व्यवस्था रहेगी। इसी तरह सभी अनुमंडलों और प्रखंडों के सरकारी अस्पतालों में भी नवजात का आधार बनेगा।

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अभी बच्चे के जन्म के साथ अस्पताल में सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम के तहत जन्म पंजीयन के लिए कागज पर एंट्री ली जाती है। नए सिस्टम में सीआरएस पंजीयन यह एंट्री उसी दिन संबंधित अस्पताल के बीसीएम के टैब में भी फीड कर दी जाएगी।जो  अगले दिन इसी पंजीयन नंबर के साथ टैब लेकर बीसीएम बच्चे के पास पहुंचेंगे और अस्पताल में भर्ती मां की यूआईडी से ऑथेंटिकेशन करा कर तत्काल बच्चे की तस्वीर भी ले लेंगे। प्राथमिकता मां की रहेगी, लेकिन पिता के आधार से भी यह संभव होगा। यानी, जन्म के 20 से 90 दिनों के भीतर बच्चे का आधार बनकर आ जाएगा। फिर बच्चा जब 5 साल का होगा तो प्रक्रिया के तहत उसका बायोमीट्रिक और आईलैश अपडेट कराना होगा। हम आपको बता दे कि अब परेशान हो रहे लोगो को इस तरह की सुविधा उपलब्ध कराने से अब कोई परेशानियों का सामना नही करनी पड़ेगी, और लोग आसानी से अपनी पहचान बनवा सकेंगे ।

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