June 5, 2020

तोड़ी बरसों की परम्परा, बेटे ना आपाये तो खुद से किया पति का अन्तिम संस्कार

 बिहार के मधुबनी जिला स्थित लखनौर प्रखंड के जोरला-बेला गांव में आज हजारों बरसो की परंपरा टूट गई। सदियों से चली आरही इस परम्परा का कारण बनी कोरोना महामारी।बरसो पुरानी परम्परा तब टूटी जब एक पत्नी ने अपने मृत पति को मुखाग्नि दे पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया।इस घटना के बाद से पूरे इलाके में यह खबर फैल गयी है।माना जा रहा है कि पहली बार इलाके में ऐसी कोई घटना घटिट हुई है जहां पत्नी ने अपने हाथों से अपने पति का अंतिम संस्कार किया हो।

दोनों बहुओं के साथ दिया शव को कंधा

मृतक अशर्फी मंडल उर्फ बौआ मंडल छह सन्तानो के पिता थे मगर अंतिम संस्कार के वक़्त उनकी एक भी सन्तान  मौजूद नही थी।लॉकडाउन की वजह से बेटे-बेटियों में से कोई भी घर नहीं आ सका । इस परिस्थिति में मृतक की पत्‍नी कौशल्‍या देवी ने दोनों बहुओं रीता देवी और शोभा देवी के साथ अर्थी को कंधा दिया, फिर मुखाग्नि भी दी। समाज ने जब साथ दिया तो विधि-विधान से कर्मकांड भी पूर्ण कर  लिया।

कहा यह मेरा सौभाग्य कि मुझे मिला ऐसा अवसर

समस्त इलाके के लिए इस तरह का यह पहला मामला था। कौशल्या देवी ने इसे अपना सौभाग्य बताते हुए कहा कि अग्नि के सात फेरे लेकर जीने-मरने की शपथ ली थी। साथ जी लिए, लेकिन मरी नहीं। खुद को धन्य समझती हूं कि पति को अपने हाथों अंतिम विदाई दे सकी। इलाके में उनके इस हौसले की चर्चा हर जुबां पर है।लोगो द्वारा उनकी काफी तारीफ की जा रही है।

लॉकडाउन के वजह से नही आ पाएं बच्चे

अशर्फी मंडल पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। 26 मार्च की रात उनका निधन हो गया। इसकी सूचना दोनों बेटों व चारों बेटियों को दी गई। बड़ा बेटा अशोक मंडल उत्‍तर प्रदेश के मथुरा की एक धर्मशाला में काम करता है। वहीं दूसरा बेटा मनोज मंडल मुंबई के बिरार में रहता है। दोनों की पत्नियां गांव में ही हैं। बेटों ने घर आने का प्रयास किया। मनोज पुलिस चौकी भी गया। लेकिन, लॉकडाउन ने उनकी राह रोक दी। अंत मे जब बेटो के आने की सारी उम्मीद धूमिल पर गयी तब कौशल्या देवी ने स्वयं अपने मृतक पति का अंतिम संस्कार कर उन्हें मुखअग्नि दी।

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