August 7, 2020

बकरीद आज, जाने क्यों मनाते हैं बकरीद और क्यों दी जाती है बकरे की कुर्बानी?

बकरीद मुसलमानों के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस साल यह त्योहार भारत में 1 अगस्त को मनाया जा रहा है। इस त्योहार को ईद-उल-अजहा, ईद-उल-जुहा या बकरा ईद के नाम से भी जानते हैं। इसे रमजान खत्म के करीब 70 दिनों के बाद मनाया जाता है। बकरा ईद पर कुर्बानी देने की प्रथा है। इस्लामिक कैलेंडर की दसवीं तारीख से 12वीं तारीख तक ये त्योहार मनाया जाएगा। शनिवार, रविवार और सोमवार तक कुर्बानियां होती रहेंगी। ईद की तरह ही इस बार भी सामूहिक नमाज और सामूहिक कुर्बानी पर रोक लगी है।

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हालांकि बिहार में शुक्रवार रात से लॉकडाउन शुरू हो गया है। ऐसे में ये त्योहार घरों में ही मनेगा। घरों पर ही नमाज पढ़ कर परिवार के साथ कुर्बानी देनी होगी। शहर मुफ्ती खालिद हमीद ने कहा है कि कुर्बानी देने वाले इसका ख्याल रखें कि उनके किसी पड़ोसी को कोई परेशानी न हो। कुर्बानी कराने में मदद करने वाले लोग अपने पास एक दो जोड़ी कपड़े अलग से रखें, जिससे खून आदि के निशान लगने पर वह कपड़े बदल कर घरों से निकले। कुर्बानी के अवशेष केवल नगर निगम की कूड़े वाली गाड़ी में ही डालें। इसको इधर उधर न फेंके। समाजसेवी गुलजार अहमद ने कहा है कि बकरीद और रक्षाबंधन दोनों बड़े त्योहार हैं। हम सब इस कोरोना काल में एक दूसरे का पूरा ख्याल रखें और मिलकर त्योहारों की खुशियां बांटे।

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इस्लाम मजहब की मान्यताओं के अनुसार, कहा जाता है कि पैगंबर हजरत इब्राहिम से ही कुर्बानी देने की प्रथा शुरू हुई थी। कहा जाता है कि अल्लाह ने एक बार पैगंबर इब्राहिम से कहा था कि वह अपने प्यार और विश्वास को साबित करने के लिए सबसे प्यारी चीज का त्याग करें और इसलिए पैगंबर इब्राहिम ने अपने इकलौते बेटे की कुर्बानी देने का फैसला किया था। कहते हैं कि जब पैगंबर इब्राहिम अपने बेटे को मारने वाले थे। उसी वक्त अल्लाह ने अपने दूत को भेजकर बेटे को एक बकरे से बदल दिया था। तभी से बकरा ईद अल्लाह में पैगंबर इब्राहिम के विश्वास को याद करने के लिए मनाई जाती है। इस त्योहार को नर बकरे की कुर्बानी देकर मनाते हैं। इसे तीन भागों में बांटा जाता है, पहला भाग रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों को दिया जाता है। दूसरा हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों और तीसरा परिवार के लिए होता है।

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