June 2, 2020

”पिता” को साईकिल से गांव लाने वाली बहादुर ”ज्योति” को अमेरिकी राष्ट्रपति की ”बेटी इवांका” ने की तारीफ, कहा साइकिल……

लॉकडाउन में पिता के फंसे होने से बेटी ज्योति परेशान हो गई और एक दिन साइकिल उठाकर चल पड़ी पिता के साथ। ज्योति ने बताया कि उसने पापा को साइकिल पर बिठाकर 10 मई को गुरुग्राम से चलना शुरू किया और 16 मई की शाम घर पहुंच गई। रास्ते में उसे बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ा, हालांकि कुछ लोगों ने उनकी मदद भी की।

ज्योति के पिता गुरुग्राम में रहकर ऑटो चलाते थे। सड़क दुर्घटना में उनके घायल होने के बाद वह 30 जनवरी को मां के साथ गुरुग्राम गई थी। मां के गांव आने के बाद वह पिता की सेवा में लगी रही। इसी बीच मार्च के तीसरे सप्ताह में लॉकडाउन हो गया। कुछ दिनों में जमा-पूंजी खर्च हो गई तो कोई रास्ता न देख ज्योति ने साइकिल से घर लौटने का फैसला किया। पिता ने ज्योति की जिद पर पांच सौ में पुरानी साइकिल खरीदी। दिव्यांग पिता को उस पर बैठाकर 10 मई की रात गुरुग्राम से घर के लिए निकली। आठ दिन में घर पहुंची तो आस-पड़ोस के लोग दंग रह गए थे। जबकि 15 साल की ज्योति ने अपने जख्मी पिता को साइकिल पर बिठाकर गुड़गांव से दरभंगा पहुंचाया। इस खुबसूरत उदहारण की  वजह से  साइक्लिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने ज्योति को अगले महीने ट्रायल के लिए बुलाया है।

 

 

ज्योति के हौसले को देख साइक्लिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने उन्हें ट्रायल के लिए बुलाया है। ट्रायल सफल रहती है तो ज्योति को दिल्ली में नेशनल साइक्लिंग एकेडमी में फेडरेशन के खर्च पर ट्रेनिंग दी जाएगी। ज्योति का कहना है कि इस ऑफर से बहुत खुश हूं, अगले महीने ट्रायल देने जाऊंगी। जबकि लॉकडाउन में पब्लिक ट्रांसपोर्ट बंद है, इसलिए ज्योति ने पैसे उधार लेकर साइकिल खरीदी और घर लौटने को तैयार हो गई। जख्म होने की वजह से मोहन खुद साइकिल नहीं चला सकते थे, इसलिए उन्होंने बेटी को ये कहकर रोकना चाहा कि मेरा वजन खींचना आसान नहीं होगा। लेकिन, ज्योति ठान चुकी थी और उसने कर दिखाया।

जबकि इस हौसले कों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बेटी और सलाहकार इवांका ट्रम्प ने बिहार की 15 साल की बच्ची ज्योति के हौसले की तारीफ की है। क्योकि ज्योति ने अपने जख्मी पिता को साइकिल पर बिठाकर 1200 किलोमीटर की दूरी तय की थी। वो 7 दिन साइकिल चलाकर अपने घर पहुंची थी। इवांका ने कहा है कि ज्योति ने जो किया, वह सहनशीलता और अपनों के लिए प्यार का एक खूबसूरत उदाहरण है। इससे भारत के लोगों की भावनाएं पता चलती हैं। 15 साल की ज्योति कुमारी, अपने घायल पिता को 7 दिनों के लिए +1,200 किलोमीटर की दूरी तय करके अपनी साइकिल के पीछे अपने घर गाँव ले गई। धीरज और प्रेम के इस खूबसूरत करतब ने भारतीय लोगों और साइकिल फेडरेशन की कल्पना को पकड़ लिया है।

 

 

इवांका ने ट्वीट कर कहा कि 15 साल की ज्योति कुमारी ने अपने जख्मी पिता को साइकिल से सात दिनों में 1,200 किमी दूरी तय करके अपने गांव ले गई। इवांका ने आगे लिखा कि सहनशक्ति और प्यार की इस वीरगाथा ने भारतीय लोगों और साइकलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। बता दें कि कोरोना संकट के कारण घोषित देशव्यापी लॉकडाउन में देश की अलग-अलग जगहों पर प्रवासी मजदूर फंस गए। ट्रेन सहित आवागमन के अन्य साधनों का परिचालन बंद होने के कारण हजारों मजदूर पैदल ही अपने-अपने घरों की ओर चल पड़े। चूंकि ज्योति के पिता मोहन पासवान कुछ महीने पहले हादसे में जख्मी हो गए थे, इसलिए वो अपने दम पर घर पहुंचने में असमर्थ थे।

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