April 5, 2020

आखिर क्या है वसंत का राग, प्रेमी को क्यों सताने लगती है प्रेमिका कि याद….

वसंत का राग

प्रेमी को क्यों सताने लगती है प्रेमिका की याद

डेस्क : जानकारी हो कि ऋतुराज वसंत का आगमन हो चुका है. वसंत ऋतु में प्रकृति भी मद मस्त चाल चलने लगती है. टेसू के फूल खिल उठते हैं. सरसों के फूल फिर से झूमकर किसानों का गीत गाने लगते हैं कोयल की कुहू-कुहू की आवाज कानों में सुनाई देने लगती है और गूंज उठता है. मादकता से युक्त पूरा वातावरण, वसंत ऋतु में प्राणायाम करने का विशेष महत्व है. इस मौसम की शुद्ध और ताजा वायु हमारे रक्त संचार को सुचारु रूप से चलाने में मददगार साबित होती है.

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जानकारी हो कि वसंत ऋतु का आगमन सरस्वती पूजा से मात्र पांच दिन पहले होता है. वसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा कहा जाता है. इसलिए तो भगवान कृष्ण भी अपने सखा अर्जुन से महाभारत के गीता श्लोक के दौरान कहा था कि हे अर्जुन मैं ऋतुओं में ऋतुराज वसंत हूं. बता दें कि वसंत ऋतु में प्रकृति का कण-कण आनंद और उल्लास से गा उठता है.  मौसम भी अंगड़ाई लेता हुआ अपनी चाल बदलकर मद मस्त हो जाता है. प्रेमी-प्रेमिकाओं का दिल धड़कने लगता है. आपको बता दें कि कामदेव का दूसरा नाम मदन है. इसलिए वसंत ऋतु में ब्रजभूमि में श्रीकृष्ण और राधा के रास उत्सव को मुख्य रूप से मनाया जाता है.

कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण के सबसे प्रिय राधा रानी से भी मिलन वसंत ऋतु में ही हुआ था, वसंत ऋतु के पहले दिन यानि वसंत पंचमी को कामिनी और कानन में स्वत: ही यौवन फूट पड़ता है. इसलिए यह प्रेमी-प्रेमिकाओं के लिए इजहारे इश्क का दिवस भी होता है.

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