April 8, 2020

बिहार का एक ऐसा गांव जहां कोरोना वायरस के जनक चमगादड़ की होती है पूजा

चाईना के बुहार शहर से शुरू हुआ कोरोना वायरस की वि‍भीषिका देश-दुनिया में तबाही मचा रही है… लेकिन इस महामरी रूपी बीमारी का करण पिछले साल दिसम्बर महीने में सामने आया था। जिसका कारण चमगादड़ को बताया गया था। क्योंकि जिसकी पुष्टी विशेषज्ञों ने भी कि है। तो वहीं वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन यानी की WHO का भी मानना है कि यह वायरस ऊंट, बिल्ली और चमगादड़ सहित कई पशुओं में भी प्रवेश कर रहा है। जिसकी बढ़ते प्रकोप को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने महामारी घोषित कर दिया तो लोगों ने इस चमगादड़ सहित कई जानवरों से लोगों ने दूरी बनानी शुरू कर दी। लेकिन बिहार का एक ऐसा गांव है जहां आज भी चमगादड़ों को सुख-समृद्धि का प्रतिक माना जाता है और उसकी पूजा कर इनके संरक्षण के लिए पूरी व्यवस्था की जाती है क्योंकि यहां के लोगों का मामना है कि घटना से पहले ही घटना को लेकर लोगों को अवगत करा देते हैं।

ये भी पढ़ें :  नल जल योजना को लेकर सरकार शख्त, गड़बड़ी पर होगी कार्रवाई !

                सुपौल जिले के एक गांव में होती है चमगादड़ों की पूजा

दरअसल सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज अनुमंडल क्षेत्र के लहर्निया गांव निवासी प्रो. अजय सिंह चमगादड़ों का अभयारण्य बनाने के लिए भी प्रयासरत हैं क्योंकि इनके पूर्वजों ने चमगादड़ों को बगीचे में पनाह दी और आज अजय उसी परंपरा को आगे बढ़ाने में जुटे हुए है। जिसके लिए प्रो. अजय सिंह ने 50 एकड़ के बगीचे में 5 लाख से भी ज्यादा चमगादड़ों को पाल रखा है और के रहने के लिए खास तौर पर पेड़ भी लगाए गए हैं। वहीं अजय सिंह के इस मुहीम में उनके परिवार के लोगों के साथ ही ग्रामीणों का भी भरपूर साथ मिलता है। यहां के लोक इस बात का हमेशा ध्यान रखते हैं कि चमगादड़ों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाए। वहीं चमगादड़ों के सरंक्षण के सवाल पर यहां के लोगों का मामना है कि वह इसे शौक से पाल रहे हैं। साथ ही यहां के लोगों की मान्यता है कि इस बस्ती के लिए चमगादड़ वरदान है और इसी के मौजूदगी के कारण आज तक यहां किसी भी तरह की कोई आपदा नहीं आ सका है। ग्रामीणों का विश्वास है कि चमगादड़ों के रहने के कारण यहां महामारी नहीं फैलती है। साथ ही गांव के कई लोगों का ने बताया कि हाल में आये भूकंप में भी चमगादड़ ने पहले ही संकेत दे दिया था। साथ ही 2008 में आई कोसी की प्रलयंकारी बाढ़ में भी यह इलाका इन चमगादड़ों के कारण ही डूबने से बचा रहा।

ये भी देखें : तेजस्वी यादव पर  ये क्या बोल गए पप्पू यादव ? 

वहीं चमगादड़ के बारे में अजय सिंह का कहना है कि यहां जो चमगादड़ रहते हैं वे शाकाहारी हैं और अन्य चमगादड़ों की अपेक्षा में बड़े हैं। इसे दुर्लभ श्रेणी का चमगादड़ माना जाता है। ये अंधेरे में निकलने हैं और सुबह होने से पहले लौट आते हैं। इन चमगादड़ो ने कभी फसल या फलों का नुकसान नहीं किया है। इस कारण गांव के लोग इन्हें शुभ मानते हैं। वहीं चमगादड़ों की चर्चा पूरे इलाके में फैली हुई है जिसके बाद इन्हें देखते दूर-दराज के लोग देखने आते हैं।

सुपौल से प्रशांत कुमार के साथ राजेश चौधरी की रिपोर्ट

 

बिहार और झारखंड के साथ ही राष्ट्रीय खबरों से हमेशा अपडेट रहने के लिए News One 11 के FACEBOOKYOU TUBE और Web Page से जुड़े।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *